15+वर्षों का अनुभव
5000+संतुष्ट परिवार
7प्रकार की पूजा सेवाएं
24x7सहयोग एवं मार्गदर्शन
पितृ दोष निवारण पूजा
हमारी सेवाएं

गया जी में संपूर्ण पूजा सेवाएं

पितरों की मुक्ति एवं परिवार की सुख-समृद्धि हेतु वैदिक रीति से संपन्न कराई जाने वाली सभी प्रमुख पूजाएं

पिंड दान पूजा

पिंड दान पूजा

Talk to Pandit Ji

पूर्वजों को पिंड अर्पण कर पितृ ऋण से मुक्ति एवं आत्मा की शांति हेतु मुख्य वैदिक अनुष्ठान।

पितृ दोष निवारण पूजा

पितृ दोष निवारण पूजा

₹11,000

कुंडली में पितृ दोष के दुष्प्रभावों को शांत कर पारिवारिक बाधाओं से मुक्ति।

नारायण बलि पूजा

नारायण बलि पूजा

Talk to Pandit Ji

अकाल मृत्यु प्राप्त पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु विशेष वैदिक कर्मकांड।

त्रिपिंडी श्राद्ध

त्रिपिंडी श्राद्ध

₹8,100

तीन पीढ़ियों के पितरों की तृप्ति एवं मोक्ष हेतु विशेष श्राद्ध विधि।

रुद्राभिषेक

रुद्राभिषेक

Talk to Pandit Ji

भगवान शिव की कृपा एवं पारिवारिक कल्याण हेतु रुद्राभिषेक अनुष्ठान।

तर्पण पूजा सेवा

तर्पण पूजा सेवा

Talk to Pandit Ji

फल्गु नदी तट पर जल अर्पण कर पितरों को तृप्त करने की पावन विधि।

श्राद्ध (गया जी)

श्राद्ध (गया जी)

Talk to Pandit Ji

पितृ पक्ष एवं वार्षिक श्राद्ध हेतु गया जी में संपूर्ण विधि-विधान।

तुलसी अर्चना पूजा

तुलसी अर्चना पूजा

Talk to Pandit Ji

तुलसी अर्चना पूजा भगवान विष्णु और माता तुलसी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र पूजा है। सनातन धर्म में तुलसी को देवी स्वरूप माना गया है और भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस पूजा में तुलसी माता का विधिवत पूजन, दीप प्रज्वलित करना, जल अर्पित करना तथा तुलसी दल से भगवान विष्णु की अर्चना की जाती है। मान्यता है कि तुलसी अर्चना से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। श्रद्धालु परिवार की मंगलकामना, आरोग्य, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रद्धा भाव से तुलसी पूजा करते हैं। तुलसी के पौधे की पूजा करने से वातावरण भी पवित्र और आध्यात्मिक बनता है।।

विष्णुपद मंदिर गयाजी

विष्णुपद मंदिर गयाजी

Talk to Pandit Ji

विष्णुपद मंदिर बिहार के गया जी में स्थित एक अत्यंत पवित्र हिंदू तीर्थस्थल है। यह मंदिर भगवान विष्णु के चरणचिह्न के लिए प्रसिद्ध है, जो एक पवित्र शिला पर अंकित माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर राक्षस गयासुर का उद्धार किया था। पितृपक्ष के दौरान यहां पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व है। देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर यहां आते हैं। मंदिर की भव्य वास्तुकला, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक वातावरण इसे गया जी का प्रमुख तीर्थ बनाते हैं।।

Welcome to Gaya Dham
गया धाम में आपका स्वागत है

मोक्ष भूमि गया जी — पितरों की मुक्ति का पावन धाम

बिहार राज्य में स्थित गया जी भारत के सबसे पवित्र एवं प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्वयं भगवान विष्णु ने गयासुर राक्षस को वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति गया जी आकर अपने पूर्वजों का पिंड दान एवं श्राद्ध कर्म करेगा, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी।

यही कारण है कि प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी एवं पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु गया जी आते हैं। यहां फल्गु नदी के तट पर, विष्णुपद मंदिर परिसर में तथा अक्षयवट के नीचे किया गया पिंड दान अक्षय फल देने वाला माना जाता है।

  • धार्मिक ग्रंथों में वर्णित एकमात्र पिंड दान स्थल
  • विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी एवं अक्षयवट का पावन संगम
  • अनुभवी गयावाल पंडितों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान
हमारे बारे में जानें
15+वर्षों का अनुभव
5000+संतुष्ट परिवार
7पूजा सेवाएं
100%वैदिक विधि-विधान
Why Pind Daan is performed in Gaya
गया जी में ही क्यों?

गया जी में पिंड दान क्यों किया जाता है?

गरुड़ पुराण एवं वायु पुराण सहित अनेक धर्मग्रंथों में गया जी को पितृ मोक्ष हेतु सर्वश्रेष्ठ स्थान बताया गया है। मान्यता है कि गया जी में किया गया श्राद्ध कर्म भारत के किसी भी अन्य तीर्थ स्थल की तुलना में अधिक फलदायी एवं स्थायी होता है — क्योंकि यहां स्वयं भगवान विष्णु के चरण (विष्णुपद) स्थित हैं।

यहां पिंड दान करने से पितरों को तीन पीढ़ियों तक तृप्ति मिलती है और परिवार पितृ ऋण से मुक्त होता है। इसीलिए हिन्दू धर्म में यह मान्यता है कि जीवन में एक बार गया जी आकर पूर्वजों के लिए पिंड दान अवश्य करना चाहिए, चाहे अन्य किसी तीर्थ पर श्राद्ध किया गया हो या नहीं।

शास्त्र सम्मतगरुड़ पुराण में वर्णित विधि
अक्षय फलतीन पीढ़ियों तक तृप्ति
परिभाषा एवं महत्व

पिंड दान क्या है?

पिंड दान एक प्राचीन वैदिक अनुष्ठान है जिसमें दिवंगत पूर्वजों को चावल, जौ का आटा, तिल एवं शहद से बने "पिंड" अर्पित किए जाते हैं

पिंड का अर्थ

चावल, जौ का आटा, काला तिल, शहद एवं शुद्ध घी से बनाया गया गोला जो पूर्वजों के प्रतीक स्वरूप अर्पित किया जाता है।

मंत्रोच्चार सहित विधि

वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ संकल्प लेकर, स्नान-शुद्धि के पश्चात पंडित जी के मार्गदर्शन में पिंड अर्पण किया जाता है।

पितृ ऋण से मुक्ति

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति पर तीन ऋण होते हैं — देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। पिंड दान से पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है।

पौराणिक कथा

गयासुर की पावन कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार गयासुर नामक एक अत्यंत पवित्र असुर था, जिसके शरीर के स्पर्श मात्र से पापी भी मोक्ष प्राप्त कर लेते थे। इससे स्वर्ग में हाहाकार मच गया क्योंकि पापी लोग भी बिना कर्मफल भोगे मोक्ष पाने लगे।

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने गयासुर से यज्ञ हेतु अपना शरीर स्थिर रखने का वचन मांगा। गयासुर की देह इतनी विशाल थी कि उस पर देवताओं ने यज्ञ संपन्न किया और अंत में भगवान विष्णु ने अपने चरण उसके सिर पर रखकर उसे सदा के लिए वहीं स्थिर कर दिया — यही स्थान आज "विष्णुपद मंदिर" के नाम से प्रसिद्ध है।

गयासुर ने अंतिम इच्छा के रूप में यह वरदान मांगा कि जो भी व्यक्ति इस पावन भूमि पर अपने पूर्वजों का पिंड दान करेगा, उसके पितरों को अवश्य मोक्ष प्राप्त होगा। भगवान विष्णु के इसी वरदान के कारण गया जी आज संपूर्ण विश्व में पितृ मोक्ष का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है।

Gayasur Legend
पावन स्थल

गया जी के प्रमुख धार्मिक स्थल

पिंड दान एवं श्राद्ध कर्म हेतु गया जी के यह छह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं पवित्र माने जाते हैं

विष्णुपद मंदिर

विष्णुपद मंदिर

भगवान विष्णु के पावन चरण चिन्ह स्थित इस मंदिर में मुख्य पिंड दान अनुष्ठान संपन्न होता है।

फल्गु नदी

फल्गु नदी

तर्पण एवं जलांजलि हेतु पवित्र फल्गु नदी का तट, जहां पूर्वजों को जल अर्पित किया जाता है।

अक्षयवट

अक्षयवट

अमरत्व का प्रतीक यह वट वृक्ष, जहां किया गया पिंड दान अक्षय एवं शाश्वत फल प्रदान करता है।

प्रेतशिला पहाड़ी

प्रेतशिला पहाड़ी

अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माओं की शांति हेतु नारायण बलि पूजा इसी पावन पहाड़ी पर संपन्न होती है।

रामशिला पहाड़ी

रामशिला पहाड़ी

मान्यता अनुसार भगवान श्रीराम ने स्वयं यहां अपने पिता दशरथ का श्राद्ध कर्म संपन्न किया था।

धर्मारण्य वेदी मंदिर

धर्मारण्य वेदी मंदिर

धर्मारण्य वेदी मंदिर गया-बोधगया क्षेत्र की पवित्र पिंड वेदियों में से एक है। यहां पितरों की शांति और सद्गति के लिए पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां पितृ कर्म करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पवित्र बोधि

पवित्र बोधि वृक्ष

पवित्र बोधि वृक्ष बोधगया का एक अत्यंत पवित्र आध्यात्मिक स्थल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यहां श्रद्धालु पितृ तर्पण एवं धार्मिक अनुष्ठान भी करते हैं और शांति, ध्यान व आध्यात्मिक साधना के लिए इस पवित्र स्थल का दर्शन करते हैं।

Pt. Prasant Bhaiya
15+ वर्षों का अनुभव
आपके मार्गदर्शक

पं. पंकज मऊआर (तीर्थ पुरोहित गया जी धाम) — अनुभवी गयावाल पंडित

हर श्रद्धालु के लिए गया जी की यात्रा एक भावनात्मक एवं आध्यात्मिक अनुभव है — हमारा प्रयास है कि प्रत्येक अनुष्ठान पूर्ण श्रद्धा, शुद्धता एवं शास्त्रोक्त विधि से संपन्न हो।

पं. पंकज मऊआर (तीर्थ पुरोहित गया जी धाम) गया जी के परंपरागत गयावाल पंडित परिवार से हैं तथा विगत 15 वर्षों से देश-विदेश के श्रद्धालुओं को पिंड दान, श्राद्ध, तर्पण एवं पितृ दोष निवारण पूजा में मार्गदर्शन दे रहे हैं। विष्णुपद मंदिर के निकट स्थित होने के कारण वे प्रत्येक यजमान को व्यक्तिगत ध्यान एवं संपूर्ण व्यवस्था के साथ पूजा संपन्न कराते हैं।

  • पारंपरिक गयावाल पंडित परिवार से संबंध
  • हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में मार्गदर्शन
  • NRI एवं विदेशी श्रद्धालुओं हेतु विशेष सहयोग
  • पूजा सामग्री एवं ठहरने की व्यवस्था में सहायता
पूजा विधि

पिंड दान की संपूर्ण प्रक्रिया

गया जी में पिंड दान पांच मुख्य चरणों में संपन्न किया जाता है

1

संकल्प

पूजा प्रारंभ करने से पूर्व यजमान द्वारा पवित्र संकल्प लिया जाता है।

2

स्नान एवं शुद्धि

फल्गु नदी में स्नान कर तन-मन की पवित्रता प्राप्त की जाती है।

3

तर्पण

पितरों की तृप्ति हेतु जल एवं तिल से तर्पण किया जाता है।

4

पिंड अर्पण

मंत्रोच्चार सहित पूर्वजों को पिंड अर्पित किए जाते हैं।

5

ब्राह्मण भोज एवं दान

ब्राह्मण भोजन एवं यथाशक्ति दान-पुण्य के साथ पूजा संपन्न होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आपके सवाल, हमारे जवाब

पिंड दान वर्ष के किसी भी दिन किया जा सकता है, परंतु पितृ पक्ष (आश्विन मास के कृष्ण पक्ष) के दौरान इसका विशेष महत्व माना जाता है। इसके अतिरिक्त परिजन की मृत्यु तिथि या किसी भी शुभ मुहूर्त पर भी यह अनुष्ठान संपन्न किया जा सकता है।

सामान्यतः पिंड दान पूजा 2 से 3 घंटे में संपन्न हो जाती है, जबकि पूर्ण श्राद्ध कर्म विधि के अनुसार 1 से 3 दिन तक चल सकता है। बुकिंग के समय आपको संपूर्ण समय-सारणी की जानकारी दे दी जाती है।

जी हां, हम NRI एवं विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधा प्रदान करते हैं। आप WhatsApp Video Call के माध्यम से पूरी पूजा लाइव देख सकते हैं, अथवा अपने किसी प्रतिनिधि के माध्यम से भी पूजा संपन्न करवा सकते हैं।

पूजा शुल्क में पंडित जी की सेवा, आवश्यक पूजन सामग्री, संकल्प एवं मंत्रोच्चार शामिल हैं। ठहरने, भोजन एवं वाहन जैसी अतिरिक्त सेवाओं की व्यवस्था अनुरोध पर अलग से करवाई जा सकती है।

श्राद्ध एक व्यापक अनुष्ठान है जिसमें प्रार्थना, तर्पण एवं ब्राह्मण भोज सम्मिलित हैं, जबकि पिंड दान विशेष रूप से पूर्वजों को "पिंड" अर्पित करने की क्रिया है। पिंड दान श्राद्ध कर्म का ही एक महत्वपूर्ण भाग है।

तिथि सुनिश्चित करने हेतु WhatsApp पर संपर्क कर बुकिंग की पुष्टि करना उचित रहता है। भुगतान की जानकारी बुकिंग के समय पंडित जी से सीधे साझा की जाती है।

दिवंगत परिजन का नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो), मृत्यु तिथि एवं यजमान का नाम बताना पर्याप्त होता है। गोत्र ज्ञात न होने पर भी पूजा शास्त्रोक्त वैकल्पिक विधि से संपन्न कराई जा सकती है।

हमारी टीम धर्मशाला/होटल में ठहरने, स्थानीय वाहन व्यवस्था एवं गया जी के अन्य पावन स्थलों के दर्शन में भी पूर्ण सहयोग करती है। आप बुकिंग के समय अपनी आवश्यकता बता सकते हैं।

हमारे यजमान क्या कहते हैं

"गयाधाम में पं. पंकज मऊआर जी ने हमारे पूर्वजों का पिंडदान और फल्गु तर्पण पूरी निष्ठा और शास्त्र-सम्मत विधि से कराया। उन्होंने हर कदम पर हमारा मार्गदर्शन किया। हमारा पूरा परिवार पूरी तरह संतुष्ट होकर लौटा।"

राजेश कुमार, पटना

"हम त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए गया जी पूरा परिवार आए थे। हमें आने से पहले फोन पर ही सारी सटीक जानकारी मिल गई थी, और स्टेशन के पास दलालों (touts) से जुड़ी कोई परेशानी नहीं हुई।"

अमित चतुर्वेदी, लखनऊ

"गया जी में नारायण बलि पूजा पूरी धार्मिक शुद्धता और विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। पं. पंकज मऊआर जी ने पूजा के दौरान हर एक मंत्र और संकल्प का अर्थ समझाया। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।"

्र
प्रियंका सिंह, रांची
सभी समीक्षाएं देखें

गया पिंड दान पूजा बुक करने के लिए आज ही संपर्क करें

कृपया गया जी पहुँचने से पहले फोन पर संपर्क अवश्य करें। स्टेशन के पास और रास्ते में मिलने वाले दलालों (touts) से सावधान रहें।

अभी बुक करें

अपनी पावन यात्रा की योजना आज ही बनाएं

तिथि निश्चित करने, पूजा सामग्री की जानकारी या किसी भी प्रश्न हेतु हमसे सीधे संपर्क करें — हमारी टीम हर कदम पर आपके साथ है।

कॉल करें
+91 82108 95586
पता

बहुआर चौरा, तिल्हा धर्मशाला के पास, गया जी, बिहार – 823001

अपनी पूजा बुक करें

फॉर्म भरें, हमारी टीम शीघ्र ही आपसे संपर्क करेगी